राष्ट्रीय

US नागरिकता छोड़ पैतृक गांव लौटीं आंध्र प्रदेश की 94 साल की बुजुर्ग, बोलीं- भारतीय बनकर मरना चाहती हूं

अमरावती। आमतौर पर अमेरिका या कनाडा जैसे देशों में बसना कई भारतीयों के लिए गर्व और सामाजिक प्रतिष्ठा का विषय माना जाता है। लेकिन, 94 वार्षिय एक महिला ने यह साबित कर दिया है कि मातृभूमि से बढ़कर दुनिया में कोई और जगह नहीं होती।

94 वर्षीय अमेरिकी नागरिक कोंड्रागुंटा महालक्ष्म्मा ने भारत सरकार से अपील की है कि उनकी भारतीय नागरिकता बहाल की जाए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा है कि उनकी अंतिम इच्छा आंध्र प्रदेश के अपने पैतृक गांव में एक भारतीय के रूप में मरने की है।

यह अनूठा मामला हाल ही में बापटला के जिला कलेक्टर वी. विनोद कुमार के समक्ष कलेक्ट्रेट के पीजीआरएस हॉल में सुनवाई के लिए आया। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, चिन्नागंजम मंडल के चिंथागुमपाला गांव की मूल निवासी महालक्ष्म्मा अपने पति नागभूषणम के निधन के बाद अमेरिका चली गई थीं।

वहां वह अपने बेटे और कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. के. बुचैया चौधरी के साथ रह रही थीं। जुलाई 2000 में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता भी हासिल कर ली थी। हालांकि, लगभग दो दशकों तक विदेश में रहने के बाद उनका मन अपनी मिट्टी के लिए तड़प उठा और 2018 में वह भारत लौटकर अपने पैतृक गांव में ही बस गईं।

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