राष्ट्रीय

डिजिटल अरेस्ट’ पर CBI का बड़ा एक्शन, दिल्ली-पंजाब से लेकर बंगाल तक 16 राज्यों में छापेमारी

नई दिल्ली। सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर लोगों को ठगने वाले एक बड़े साइबर क्राइम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में सीबीआई ने 16 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया है।

अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि इस संगठित नेटवर्क ने 200 से अधिक मामलों में लोगों को धोखा देने के लिए भारत के सुप्रीम कोर्ट की एक फर्जी वेबसाइट का सहारा लिया था।

सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट से धोखाधड़ी

यह पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से प्राप्त एक शिकायत के आधार पर शुरू की गई, जिसके बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने एक ऐसी फर्जी वेबसाइट का खुलासा किया, जिसका वेब एड्रेस बिल्कुल सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसा था।

जालसाज इसी डोमेन का उपयोग करके कानूनी अधिकार होने का झूठा दिखावा करते थे और पीड़ितों को डिजिटल अरेस्ट की धमकियां देकर डराते थे। अपनी धोखाधड़ी को असली दिखाने के लिए आरोपी फर्जी अदालती आदेश और जांच एजेंसियों के जाली दस्तावेज भी अपलोड करते थे।

ऑपरेशन चक्र-VI के तहत कार्रवाई

इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से सीबीआई ने ऑपरेशन चक्र-VI के तहत 60 विशेष टीमों का गठन किया। इन टीमों ने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में एक साथ छापेमारी की।

इस अभियान के दौरान चेन्नई से बी. नरेश और कोलकाता से संजीब साहा को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों शेल कंपनियां बनाने और म्यूल बैंक खाते खोलने व संचालित करने में शामिल थे, जिनका उपयोग अपराध से कमाए गए लगभग 2 करोड़ रुपये की हेराफेरी के लिए किया गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले तार

उन्नत तकनीकी विश्लेषण और फोरेंसिक उपकरणों का उपयोग करते हुए, जांचकर्ताओं ने इस साइबर अपराध के पूरे बुनियादी ढांचे की पहचान की है, जो भारत के साथ-साथ विदेशों में भी संचालित हो रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने केवल भारतीय नागरिकों को ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के लोगों को भी निशाना बनाकर उनके साथ धोखाधड़ी की है।

तलाशी के दौरान अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद की हैं, जिनमें डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और बैंक लेनदेन के अहम रिकॉर्ड शामिल हैं। इन सभी को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

विदेशी नागरिकों के भी ठगे जाने की पुख्ता आशंकाओं को देखते हुए सीबीआई उचित माध्यमों से अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ प्रासंगिक जानकारी साझा कर रही है।

अधिकारियों ने कहा कि इस बड़े नेटवर्क की जांच अभी जारी है। जैसे-जैसे जांच की परतें खुलेंगी और नेटवर्क के अन्य लोगों का पता चलेगा, भविष्य में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है।

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