
फरीदाबाद, 09 जुलाई । हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने फरीदाबाद जिला जेल नीमका में न्यायिक अभिरक्षा (कस्टडी) के दौरान एक विचाराधीन बंदी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने शिकायत पर सुनवाई करते हुए महानिदेशक कारागार, हरियाणा, पंचकूला से महानिदेशक (जाँच), हरियाणा मानवाधिकार आयोग के माध्यम से अगली सुनवाई से पूर्व विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मृतक रंकित उर्फ रितिक को न्यायिक अभिरक्षा (कस्टडी) के दौरान लगातार शारीरिक एवं मानसिक प्रताडऩा का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मृतक अवसाद से पीडि़त था, इसके बावजूद उसे समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक उपचार उपलब्ध नहीं कराया गया तथा उसकी मानसिक स्थिति के अनुरूप आवश्यक निगरानी एवं सुरक्षा उपाय भी नहीं अपनाए गए। शिकायत में आयोग से यह अनुरोध किया गया है कि यह जांच की जाए कि मृतक का उपचार किस चिकित्सक अथवा मनोचिकित्सक द्वारा किया गया, उसे कौन-कौन सी दवाइयां दी गईं, जेल प्रशासन द्वारा आत्महत्या रोकथाम संबंधी मानकों एवं जेल नियमों का पालन किया गया या नहीं तथा घटना के समय ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका क्या रही। शिकायतकर्ता निखिल ने आयोग से मृतक से संबंधित सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी आग्रह किया है। इनमें जेल परिसर की सीसीटीवी फुटेज, कंट्रोल रूम एवं सुरक्षा टावरों की रिकॉर्डिंग, प्रवेश एवं निकास रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, दैनिक डायरी, विजिटर रजिस्टर, मेडिकल एवं मनोचिकित्सकीय रिकॉर्ड, शिकायत रजिस्टर तथा अन्य संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त शिकायत में संबंधित अधिकारियों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (ष्टष्ठक्र), लोकेशन, घटना के समय की संचार जानकारी तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भी सुरक्षित रखने की मांग की गई है, ताकि न्यायिक अभिरक्षा में हुई मृत्यु की परिस्थितियों की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके। शिकायतकर्ता ने आयोग के सदस्य दीप भाटिया से मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई करने तथा मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने का भी अनुरोध है। असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने इन आरोपों पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए महानिदेशक कारागार, हरियाणा को निर्देश दिए हैं कि आरोपों के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट महानिदेशक (जाँच), हरियाणा मानवाधिकार आयोग के माध्यम से आयोग के समक्ष अगली सुनवाई से पूर्व प्रस्तुत की जाए। आयोग ने इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त, 2026 निर्धारित की है।





