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फरीदाबाद : क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण में देरी, निगम ने एजेंसी को जारी किया नोटिस

फरीदाबाद, 19 जून । फरीदाबाद में राजा नाहर सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के आधुनिकीकरण कार्य की धीमी प्रगति को लेकर नगर निगम ने निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। निगम ने परियोजना का कार्य संभाल रही रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड को नोटिस जारी कर निर्माण गतिविधियों को तेज करने और विस्तृत कार्ययोजना (एक्शन प्लान) और सीपीएम/पर्ट चार्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। स्टेडियम की स्थिति काफी खराब होने के चलते साल इसे नए सिरे से बनाने की योजना बनाई गई थी। 2015 में तत्कालीन सीएम मनोहर लाल खट्टर ने स्टेडियम का जीर्णोद्धार करने की घोषणा की थी। जिसे लेकर नगर निगम ने 135 करोड़ रूपए का बजट तैयार किया, लेकिन सरकार ने उसमें से 115 करोड़ रूपए को ही मंजूरी दी। जिसके बाद जनवरी 2019 में स्टेडियम को नई तकनीकी से बनाने का काम शुरू कर दिया गया। साल 2020 तक स्टेडियम का काम ठीक चलता रहा, लेकिन साल के बीच में आकर निमार्ण कर रही कंपनी ने काम बंद कर दिया। इसके बाद एफएमडीए ने इसके लिए 292 करोड़ रूपए की योजना तैयार की है। अभी नगर निगम के द्वारा इसका काम कराया जा रहा है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार स्टेडियम परियोजना को तय समय के भीतर पूरा करने के लिए संबंधित एजेंसी को कई बार निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य गति नहीं पकड़ सका है। निगम का कहना है कि पहले भी विभिन्न तिथियों पर पत्राचार कर एजेंसी को काम शुरू करने और प्रगति बढ़ाने के लिए कहा गया था, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि काम में किसी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाही की जाएगी। निगम ने नोटिस में कंपनी से परियोजना के प्रत्येक चरण का विस्तृत रोडमैप, कार्य पूरा करने की समयसीमा, मशीनों एवं श्रमिकों की उपलब्धता और निर्माण कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही सीपीएम और पर्ट चार्ट प्रस्तुत कर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं कि कार्य किस प्रकार निर्धारित अवधि में पूरा किया जाएगा। नगर निगम कमिश्नर धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि प्रशासन ने एजेंसी को चेताया है कि यदि निर्माण कार्य में और देरी हुई। इसके अलावा अगर समय पर दूसरे जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए तो अनुबंध की शर्तों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पडऩे पर शेष कार्य किसी अन्य माध्यम से एजेंसी के खर्च और जोखिम पर भी पूरा कराया जा सकता है।

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